Parvaaz – Beparwah Lyrics

कर सकी शाम क्या है?
कर सका ये जाम क्या?
रोज़-रोज़ फिर रहा क्यूँ तू बे-परवाह?

शोर-ओ-गुल भरा ज़माना
नाम का है सब यहाँ
क्या तू लेके आया? और क्या लेगा जाँ?

ओ, ये तिफ़्ल-ए-बारगाह
ना हो यहीं आख़री पयाम

नाज़नीं, मह-जबीं
ये बात दिल में सुलगती क्यूँ?
हुस्न तो है गुमाँ यहाँ

ये मिज़ाज, बयाँ, नार-ए-अज़ाब है क्या?
मह-जबीन, हसीन, तरीन, ख़ुमार क्या?

ये फ़ितूर, नासूर, नाज़ इस पे क्यूँ है, यार?
हो ज़हीन ये बात, ये रात, मज़ार, यार

ओ, ये तिफ़्ल-ए-बारगाह
अटा हो इसे सब्र का पयाम

नाज़नीं, मह-जबीं
ये बात दिल में सुलगती क्यूँ?
हुस्न तो है गुमाँ यहाँ

Comments (0)