ऐसी मैंने क्या खता की है?
के आना जाना बातें कम सी है
ऐसी मैंने क्या खता की है?
के आना जाना बातें कम सी है
हिसाब मे कच्ची हूं पहले से
समझाओ ना रूठे हो तुम किस वज़ह से
जब तुम मिले थे दिन सुनहरे, रात राज़ी थी
जब तुम मिले थे, दिशाएं खुद को भी खोज पायी थी
अब आना जाना, बातें कम सी है
फिर क्यों रोज़ाना रातें लंबी है
ऐसी मैंने क्या खता की है?
ये सज़ा कहो किस वज़ह की है
ना आखें मिलती यू ख़फ़ा सी है
छोटी, शायद बड़ी खता की है
ख़ामोशी किस्से सुनाती है
हिसाब मे कच्ची हूं पहले से
समझाओ ना रूठे हो तुम किस वज़ह से
जब तुम मिले थे दिन सुनहरे, रात राज़ी थी
जब तुम मिले थे, दिशाएं खुद को भी खोज पायी थी
अब आना जाना, बातें कम सी है
फिर क्यों रोज़ाना रातें लंबी है
ऐसी मैंने क्या खता की है?
ऐसी मैंने क्या खता की है?
क्या तुम जाने ना दे सकोगे, छोड़ो ना जाने भी दो
ये किनारा मेरा तुम्हारा
तोड़ो ना, बनाने भी दो
बनी बनाई आसानीयां
मोड़ों ना, मनाने भी दो
क्या तुम जाने ना दे सकोगे
ऐसी मैंने क्या खता की है
ऐसी मैंने क्या खता की है?
ऐसी मैंने क्या खता की है?
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