क्यूँ रहती है तू धूप के मौसम को कोसती?
बेहतर है, कर ले ज़िंदगी, बादल से दोस्ती
जीना है तो वजह भी ढूँढ ले
साहिल ना सही, तिनका ही ढूँढ ले
क्यूँ रहती है तू धूप के मौसम को कोसती
बेहतर है, कर ले ज़िंदगी, बादल से दोस्ती
सपनों की ख़िदमत में कोशिश तो कर पहले
गागर भी छलकेगी, बूँदें तो भर पहले
अंधी-बहरी सी गलियों में तू क्यूँ गुमनाम है?
इनके बाहर जो दुनिया है, तेरा आयाम है
जीना है तो वजह भी ढूँढ ले
साहिल ना सही, तिनका ही ढूँढ ले
क्यूँ रहती है तू धूप के मौसम को कोसती?
बेहतर है, कर ले ज़िंदगी, बादल से दोस्ती
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