Neeti Mohan – Pari Lyrics

ख़्वाब में थी जो परी, नींद टूटी तो खो गई
ना ज़मीं, ना आसमाँ, वो हवाओं की हो गई

ज़िद है मेरी आँखों की ये
फिर से मिले आकर मुझे
ख़्वाबों की वो परी

एक निशाँ रह गया मेरे ज़हन पर वहीं
छू गई थी जहाँ ज़िंदगी
पूछते फिर रहे सारे सवालों में हम
है भला अब कहाँ ज़िंदगी?

ज़िद है मेरी साँसों की ये
फिर से उन्हें आ थाम ले
ख़्वाबों की वो परी
ख़्वाबों की वो परी

वक्त की राह पर कोई भी ऐसा ना था
जानता था तेरा जो पता
हर घड़ी बढ़ रहा ये बीच का फ़ासला
तू कहाँ है? तू ही अब बता

ज़िद है मेरी बाँहों की ये
फिर से लगे आ के गले
ख़्वाबों की वो परी
ख़्वाबों की वो परी
ख़्वाबों की वो परी

ख़्वाब में थी जो परी, नींद टूटी तो खो गई
ना ज़मीं, ना आसमाँ, वो हवाओं की हो गई

ज़िद है मेरी आँखों की ये
फिर से मिले आकर मुझे
ख़्वाबों की वो परी

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