Faheem Abdullah – Khwaab Lyrics

तू आसमाँ, बना मैं ज़मीं
तेरी कमी खलती रही
तू आसमाँ, बना मैं ज़मीं
तेरी कमी खलती रही

तेरी यादों में खोया
तेरी आँखों में सोया
तेरी राहों पे मिल जाऊँ कहीं

तू आसमाँ, बना मैं ज़मीं
तेरी कमी खलती रही

तुम ख़्वाब हो मेरा
उमर-भर की बेदारी के बाद की नींद हो
उम्मीद हो ख़ुलूस से जारी
तुम ख़्वाब हो मेरा, तुम ख़्वाब हो

तुम्हें जैसा दिखा मैं, वैसा शायद था भी ना
अब वैसा बन रहा हूँ
जैसा तुम्हें दिखूँगा, ओ
तुम ख़्वाब हो मेरा, तुम ख़्वाब हो

इस चाहत से राहत है
अब इस हालत की आदत है
मेरा दिल तब से सलामत है
ये है जब से तेरी अमानत में

मेरा दिल तब से सलामत है
ये है जब से तेरी अमानत में
ये है जब से तेरी अमानत में

वल्लाह, इश्क़, इश्क़ है, इबादत है
वल्लाह, इश्क़, इश्क़ है, मोहब्बत है
वल्लाह, इश्क़, इश्क़ है, मोहब्बत है
वल्लाह, इश्क़, इश्क़ है, इबादत है

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