चुपके-चुपके एक खिलौना तोड़ा है सब ने
बीच डगर में हम को अकेला छोड़ा है सब ने
क्यूँ हमारा कोई नहीं इस दुनिया में?
सब कहते है, "माँ रहती आसमाँ में"
ओ, चंदा तेरे संग क्याँ रहती है मेरी माँ?
क्याँ मेरे बारे में कुछ कहती है मेरी माँ?
पुकारूँ उसे जो छुपालेगी मुझको जहाँ पे कोई देखे ना मुझे
क्याँ उसे कहता होगा ये कहानी मेरी जो टिम-टिमाता है तारा
मेरी आँखों में रहता है हर पल मीठा-धुंधला सा सपना तुम्हारा
क्याँ उसे कहता होगा ये कहानी मेरी जो टिम-टिमाता है तारा
मेरी आँखों में रहता है हर पल मीठा-धुंधला सा सपना तुम्हारा
डर लगता है अंधेरों से, उजालों से भी
चोट लगे तो रोके चुप हो जाते सभी
निंदिया आए तो कोई ना सुलाए
निंदिया आए तो कोई ना सुलाए
चंदा-मामा पास आपने क्यूँ ना बुलाए?
इतनी सी बात हमें क्यूँ ना तू बताए?
कहते है हम जो भी क्याँ सुन लेती है, माँ?
क्याँ मेरे बारे में कुछ कहती है मेरी माँ? (माँ, माँ, माँ, माँ)
पुकारूँ उसे जो छुपालेगी मुझको जहाँ पे कोई देखे ना मुझे
क्याँ उसे कहता होगा ये कहानी मेरी जो टिम-टिमाता है तारा
मेरी आँखों में रहता है हर पल मीठा-धुंधला सा सपना तुम्हारा
क्याँ उसे कहता होगा ये कहानी मेरी जो टिम-टिमाता है तारा
मेरी आँखों में रहता है हर पल मीठा-धुंधला सा सपना तुम्हारा
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