Umer Farooq – Patang Lyrics

रात के तीन बजे
मेरी आँख खुले
रात के तीन बजे
मेरी आँख खुले
तेरी याद के सिलसले
नींद आये न फिर भी
देखता में रहूं सपने तेरे
तेरी याद की हवाओं में दिल मेरा
दिन रात उडता रहे पतंग जैसे
हे हे हे हे
तेरी याद की हवाओं में दिल मेरा
दिन रात उडता रहे पतंग जैसे
हे हे हे हे
कहाँ हुन में
कहाँ हे तू
हैं कैसे फ़ासले
कहय न जो
लफ्ज़ तू ने
हैं साथ मेरे
तेरी याद की हवाओं में दिल मेरा
दिन रात उडता रहे पतंग जैसे
हे हे हे हे
तेरी याद की हवाओं में दिल मेरा
दिन रात उडता रहे पतंग जैसे
हे हे हे हे
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
नहीं जीना तेरे बिना जीना
नहीं जीना तेरे बिना जीना
नहीं जीना तेरे बिना जीना
नहीं जीना तेरे बिना जीना
नहीं
जीना तेरे बिना
नहीं जीना
तेरे बिना आ आ आ आ आ आ आ आ आ
नहीं जीना तेरे बिना जीना
नहीं जीना तेरे बिना जीना
नहीं जीना तेरे बिना जीना
नहीं जीना तेरे बिना जीना
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ आ ओ ओ ओ ओ

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