अच्छे (अच्छे, अच्छे, अच्छे, अच्छे, अच्छे)
मुझे तुम चुपके-चुपके जब ऐसे देखती हो
अच्छी लगती हो
कभी ज़ुल्फ़ों से, कभी आँचल से जब खेलती हो
अच्छी लगती हो
मुझे देख के जब तुम यूँ ठंडी आहें भरते हो
अच्छे लगते हो
मुझको जब लगता है, तुम मुझ पर ही मरते हो
अच्छे लगते हो
तुम में, ऐ मेहरबाँ, सारी हैं ख़ूबियाँ
भोलापन, सादगी, दिलकशी, ताज़गी
दिलकशी तुम से है, ताज़गी तुमसे है
तुम हुए हमनशीं, हो गई मैं हसीं
रंग तुम से मिले हैं सारे
तारीफ़ जो सुन के तुम ऐसे शरमा जाती हो
अच्छी लगती हो
कभी हँस देती हो और कभी इतरा जाती हो
अच्छी लगती हो
मुझे देख के जब तुम यूँ ठंडी आहें भरते हो
अच्छे लगते हो
खोए से तुम हो क्यूँ? सोच में गुम हो क्यूँ?
बात जो दिल में हो, कह भी दो, कह भी दो
सोचता हूँ कि मैं क्या पुकारूँ तुम्हें?
"दिलनशीं," "नाज़नीं," "माह-रू," "महजबीं"
ये सब हैं नाम तुम्हारे
मेरे इतने सारे नाम हैं, जब तुम ये कहते हो
अच्छे लगते हो (अच्छे, अच्छे, अच्छे, अच्छे)
मेरे प्यार में जब तुम खोए-खोए से रहते हो
अच्छे लगते हो
मुझे तुम चुपके-चुपके जब ऐसे देखती हो
अच्छी लगती हो
कभी ज़ुल्फ़ों से, कभी आँचल से जब खेलती हो
अच्छी लगती हो, अच्छे लगते हो
अच्छी लगती हो, अच्छे लगते हो
अच्छी लगती हो, अच्छे लगते हो
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