दुल्हन सी सजी धरती
खुला वो आसमाँ
हो, दुल्हन सी सजी धरती
खुला वो आसमाँ
बुलाता है हमें फिर वो
चाहत का जहाँ
आ, अब लौट चलें
हो, आ, अब लौट चलें
आ, अब लौट चलें
ओ, आ, अब लौट चलें
अनजान था मैं, नादान था मैं
तेरे प्यार को जो ना समझ पाया
तूने इतना बेचैन किया
मैं तेरे पास चला आया
तेरी साँसें मेरा जीवन
मेरे दिल में तेरा घर है
ज़रा देखे कोई इस को
ये जन्नत से भी सुंदर है
बिना तेरे नहीं चैनाँ
नहीं चैनाँ यहाँ
आ, अब लौट चलें
हो, आ, अब लौट चलें
आ, अब लौट चलें
हाँ, आ, अब लौट चलें
एक पल के लिए, एक दिन के लिए
ना दूर मैं तुझ से जाऊँगी
तेरी पलकों की इन गलियों में
सपनों की सेज सजाऊँगी
तुझे देखूँ, तुझे चाहूँ
तेरी ख़ुशबू में खो जाऊँ
यही मेरी तमन्ना है
तेरी बाँहों में सो जाऊँ
दर्द-ए-दिल नहीं सहना
नहीं सहना यहाँ
आ, अब लौट चलें
ओ, आ, अब लौट चलें
आ, अब लौट चलें
आ, अब लौट चलें
दुल्हन सी सजी धरती
खुला वो आसमाँ
बुलाता है हमें फिर वो
चाहत का जहाँ
आ, अब लौट चलें
हो, आ, अब लौट चलें
आ, अब लौट चलें
हो, आ, अब लौट चलें
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