चलना है, चलते रहना
धीमे-धीमे से बहना
सावन की तन्हाई में
बादल से कुछ है कहना
कहना है, कहते रहना
बातें दिल की हैं करना
क़िस्मत की अंगड़ाई में
ख़्वाबों से फिर है मिलना
हमसफ़र है ज़िंदगानी
अजनबी है, थोड़ी अनजानी
दिल ये बेफ़िकर, है बेख़बर
मंज़िल की नहीं फ़िकर
डूबे हैं अपनी धुन में, धुन में
दिल ये बेफ़िकर, है बेख़बर
मंज़िल की नहीं फ़िकर
डूबे हैं अपनी धुन में, धुन में
लम्हे गुज़रे से लगे
कैसे मैं इन्हें रोक लूँ?
राहें क्यूँ मुड़ी सी लगे?
कैसे मैं इन्हें जोड़ लूँ?
इक नज़र है ज़िंदगानी
मनचली है, थोड़ी मनमानी
दिल ये बेफ़िकर, है बेख़बर
मंज़िल की नहीं फ़िकर
डूबे हैं अपनी धुन में, धुन में
दिल ये बेफ़िकर, है बेख़बर
मंज़िल की नहीं फ़िकर
डूबे हैं अपनी धुन में, धुन में
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