माटी माटी मैं, माटी माटी तू
माटी-माटी मैं, माटी-माटी तू
माटी काया है तन, माटी है हरषु
माटी से सब आया है, सब माटी मे मिल जाएगा
कुदरत है पागला
कुम्हार जाने कैसा घड़ा बनाएगा
कुदरत की करनी को तू काहे समझे भूल है
ओह माटी के इन्सा केहदे झुटे तेरे उशुल हैं
माटी को सीने से लगा के केहदे
माटी मुझे क़बूल है
माटी मुझे क़बूल है
मेरी माटी मुझे क़बूल है
माटी-माटी मैं, माटी-माटी तू
माटी-माटी मैं, माटी-माटी तू
माटी काया है तन, माटी है हरषु
हर साज़ नये सुर का था यहाँ
गीतों की भरमार है
हर गीत दिल को छू जाएगा
सोच में जो थोड़ा प्यार है
कुदरत पे कसता लगाम
ये कैसा तेरा जुनून है
अपना ले माटी मन में रे
यह नफ़रत तेरी फ़िज़ूल है
माटी को सीने से लगा के केहदे
माटी मुझे क़बूल है
माटी मुझे क़बूल है
मेरी माटी मुझे क़बूल है
माटी-माटी मैं, माटी-माटी तू
माटी-माटी मैं, माटी-माटी तू
माटी काया है तन, माटी है हरषु
माटी माटी मैं, माटी माटी तू
माटी माटी मैं
माटी माटी तू

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