Rahul Ram – Yaara Maula Lyrics

यारा मौला, यारा मौला
हाँ हाँ यादों मैं हे अब भी
क्या सुरीला वो जहाँ था
हमारे हाथों मैं रंगीन गुबारे थे
ओर दिल मैं महकता समा था
यारा मौला
वो तो ख्वाबों की थी दुनिया
वो किताबों की थी दुनिया
साँस मैं थे मचलते हुए ज़लज़ले
आँख मैं वो सुहाना नशा था
यारा मौला
वो ज़मीन थी, आसमान था
हमको लेकिन क्या पता था
हम खड़े थे जहाँ पर
उसी के किनारे पे गहरा सा अँधा कुआँ था
यारा मौला
फिर वो आए भीड़ बनाकर
हाथ मैं थे उनके खंजर
बोले फेंको ये किताबें
ओर संभालों ये सलाखें
ये जो गहरा सा कुआँ हे
हाँ हाँ अँधा तो नहीं हे
इस कुँए मैं हे ख़ज़ाना
कल की दुनिया तो यहीं हे
कूद जाओ ले कर खंजर
काट डालो जो हो अंदर
तुम ही कल के हो शिवाजी
तुम ही कल के हो सिकंदर
हमने वो ही किया जो उन्होने कहा
क्यूंकी उनकी तो ख्वाहिश यही थी
हम नहीं जानते ये भी क्यूँ ये किया
क्यूंकी उनकी फरमाइश यही थी
अब हमारे लगा ज़ायक़ा खून का
अब बताओ करें तो करें क्या
नहीं हे कोई जो हमें कुछ बताए
बताओ करें तो करें क्या

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