तेरी और मेरी अधूरी सी ये दुनिया है
फ़िर भी कहाँ है तू?
सारी इन रातों की दूरी अब ना सहूँ मैं
फ़िर तू ना साथ क्यूँ?
आए तू इस-क़दर
जाए सब छोड़ कर
ढूँढूँ पर हूँ बे-ख़बर
कब से मैं बे-क़रार, तेरा है इंतज़ार
कब से मैं बे-क़रार, लगता जैसे से इम्तेहा
कब से मैं बे-क़रार, तेरा है इंतज़ार
कब से मैं बे-क़रार
मेरी ज़ुबाँ की है खोए अलफ़ाज़ तू
फ़िर भी नाराज़ क्यूँ?
तेरी कहानी की खोई आवाज़ हूँ
तुझको ख़बर ना क्यूँ?
आए तू इस-क़दर
जाए सब छोड़ कर
ढूँढूँ पर हूँ बे-ख़बर
कब से मैं बे-क़रार, तेरा है इंतज़ार
कब से मैं बे-क़रार, लगता जैसे से इम्तेहा
कब से मैं बे-क़रार, तेरा है इंतज़ार
कब से मैं बे-क़रार
तेरे बिना अधूरा सा जहाँ
मन ये सरफ़िरा, ढूँढे हर जगह
तेरे बिना अधूरा सा जहाँ
मन ये सरफ़िरा, ढूँढे हर जगह
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