ऐ, जान-ए-जिगर, दिल में समाने आजा
ऐ, जान-ए-जिगर, दिल में समाने आजा
उजड़ी हुई बस्ती को बसाने आजा
ऐ, जान-ए-जिगर
दिल दर्द से बेताब है, ओ, जान-ए-तमन्ना
आराम का पैग़ाम सुनाने आजा
आराम का पैग़ाम सुनाने आजा
ऐ, जान-ए-जिगर
परवाना बड़ी देर से है आस लगाए
ऐ, शम्मा ना कर देर, जलाने आजा
ऐ, शम्मा ना कर देर, जलाने आजा
ऐ, जान-ए-जिगर
तरसी हुई नज़रों को है दीदार की हसरत
बरखा की तरह प्यास बुझाने आजा
बरखा की तरह प्यास बुझाने आजा
ऐ, जान-ए-जिगर
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