छुप गए तेरी बाँहों में जब शाम हो आए
अब जो कह देगा तो कैसे दूर हम जाएँ?
लगे कि तू है तू, ये जो तेरी ख़ुशबू
आसमान में, कि उस जहाँ में, कि किस ज़मीं में हूँ
है बहाना तू, है ख़ूबसूरत तू
अब ना जाना तू
यूँ तो चलते रहते दुनिया के सिलसिले
भागता रहा, ना चैन है मुझे, ज़िंदगी के काम दिन-रैन हैं मुझे
ढूँढा भी नहीं, मगर, पास है मेरे
ऐसे भी नज़ारे तभी से जुड़े हुए, मेरे पास तू है, एहसास है मुझे
इस अजनबी दुनिया में कभी ना बदला तू
कि जितना मैं तेरे पास हूँ कर और तमन्ना तू
है बहाना तू, है ख़ूबसूरत तू
अभी ना जाना तू, कभी ना जाना तू
मैं कुछ नहीं समझूँ, जो कुछ नहीं जानूँ
ख़ुली नज़र रख के भी नज़र ना आए, मगर, हमको
दूर करें हम जो तुझे ना समझे तो
लगानियाँ, मजबूरियाँ हैं, पास बुलाना तू
मेरा रास्ता है तू, मेरा आसरा है तू
मेरा साथ रखना तू
मेरी तन्हाई के कितने राज़ हैं छिपे
तू भी चाहता है आऊँ पास मैं तेरे, खोने से पहले मिल जाऊँ मैं तुझे
ख़ुश है जो ये सारे रंग आज हैं सजे
एक-दूसरे से जब दिल दो मिले, ज़िंदगी ये कैसे नयी ढंग से चले?
है बहाना तू, है ख़ूबसूरत तू
अभी ना जाना तू, कभी ना जाना तू
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