बादल जैसी दुनिया रे, दुनिया रे, दुनिया
रे फांसे उड़ती मुनिया रे, मुनिया रे, मुनिया
जो छूने चली खुला आसमाँ, कहीं बुझ ना जाए, ना जाए, ना जा
ए बेचारी दास्ताँ-आ-आ-आ-ज तां-आ-आ-आ-ज, जो छूने चली खुला
आसमाँ, कहीं भुज ना जाए, ना जाए, ना जाए बेचारी दास्ताँ
मौला रे साईया, सुन ले दुहाइयां
मौला रे साईया, सुन ले दुहाइयां, सुन ले दुहाइयां हाय!
हाय!
हाय!
हाय!
हाय!
हाय!
फिरती थी हवाओं में, पर लगते थे पांवों में
जिंदगी बंद पिंजरे में क्यों आज रहती है?
हां हां हां हां हां हां हां हां
नींदों के संदूकों में, कभी सोने के सपने थे
आज पीतल के टुकड़ों को मोहताज रहती है
बादल जैसी दुनिया रे, दुनिया रे, दुनिया
रे फांसे उड़ती मुनिया रे, मुनिया रे, मुनिया
रे फांसे उड़ती मुनिया रे, मुनिया रे, मुनिया
जो छूने चली खुला आसमाँ, कहीं बुझ ना
जाए, ना जाए, ना जाए बेचारी दास्ताँ
जो छूने चली खुला आसमाँ, कहीं बुझ ना
जाए, ना जाए, ना जाए बेचारी दास्ताँ
मौला रे साईया, सुन ले दुहाइयां, मौला रे साईया, आह आह आह आह
सुन ले दुहाइयां सुन ले दुहाइयां ए दुहाइयां दुहाइयां ओ मौला रे

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