तू ही तो है
तू ही तो है
जो हंसते हंसते आँखें भर सकती है
अब इतनी तो पहचान हो गयी
नहीं है तो नहीं है तू
अब छोड़ा है तो
सच में छोड़ दे मुझको
क्यूँ हर पल की मेहमान हो गयी
मैं यूँ तन्हा जीता हूँ
जैसे कोई मरता
ये भी कोई होना है
जो है आँखें भरता
यूँ तेरा होना भी
और तन्हा करता
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